बेहद खूबसूरत, मासूम और बोल्ड। 21 साल की पहाड़ की यह बेटी दो साल पहले चंडीगढ़ में जॉब करने आई थी। 17 नवंबर 2017 की शाम जब घर लौट रही थी तो ऑटो में बैठे तीन लोगों ने गैंगरेप किया। बहादुर बच्ची न तो टूटी और न ही बिखरी। अपने जीवन के साथ इंसाफ करने का माद्दा और जज्बा खूब है। कहती है- उन्हें सजा दिलानी है जो बच्चियों को बेबस, कमजोर, लाचार समझकर उनकी जिंदगी तबाह करने की हिमाकत करते हैं…

 

फाइटर… यह था मामला… दूसरों से ऐसा न करें, इसलिए सजा दिलवाने की ठानी मासूम थी, पर हार नहीं मानी

घर में कोई भी गलत बात करता तो मेरे बर्दाश्त से बाहर हो जाता। फिर जो मेरे साथ हुआ, उसे मैं कैसे बर्दाश्त करती। अंदर का एग्रेशन और गुस्सा तब तक नहीं निकलेगा जब तक मैं खुद उनको सजा न दे दूं। जो दर्द मैंने सहा है, वह उन लोगों को देना चाहती हूं। कोर्ट में आज इस केस पर फैसला होगा। चाहती हूं कि तीनों को फांसी हो। ऐसे लोग धरती पर बोझ हैं। खुद की बेटियां हैं, फिर भी एक लड़की का दर्द नहीं समझ पाए। 22 हजार की नौकरी करती थी। 7-8 हजार अपने पर खर्च कर बाकी के पैसे हर महीने मां की सपोर्ट के लिए घर भेज देती थी। पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी मां पर आई और वे नौकरी करने लगी। छोटा भाई है, जिसकी पढ़ाई पर भी पैसा लग रहा है। इस हादसे के बारे में दोस्तों और ऑफिस को पता लग गया था।

मीडिया के जरिए मेरे पीजी में भी जानकारी पहुंच गई थी। हादसे के कारण मैं दूसरी नौकरी भी ज्वाॅइन नहीं कर पाई। मेरे साथ हुए हादसे का पता मेरे घरवालों को भी नहीं है। अब सबकुछ भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हूं। इतनी सपोर्ट और बोल्ड होने के बावजूद भी कभी न कभी तो ब्रेकिंग पॉइंट आता ही है, जब आप टूट जाते हैं। इस मिसहैप के कई महीने गुजरने के बाद अभी भी कई बार नींद में चीखती हूं। ऐसा लगता है जैसे किसी ने पीछे से जकड़ रखा है। दम घुटने लगता है और ऐसा लगता है कि सांस रुकने वाली है। तभी अचानक नींद टूटती है। पानी पीती हूं, मुंह पर छींटे मारती हूं। फिर से सोने की कोशिश करती हूं। महीने में दो-तीन बार ऐसा होता है।

17 नवंबर 2017 की शाम को नई जॉब के लिए मुझे स्टेनो का कोर्स करना था। मैं पहले दिन स्टेनो ट्यूशन के लिए पहुंची थी। 15-20 मिनट की बातचीत के बाद मैंने घर की राह ली। जब ऑटो आया तो मैंने एड्रेस पूछा और मां से फोन पर बात करते हुए ऑटो में बैठ गई। दो सवारी थी एक पीछे और एक आगे। सब नॉर्मल लग रहा था। इतने में ऑटो खराब हो गया। मैंने उतरना चाहा। ऑटोवाले ने कहा कि यदि मैं उतरी तो उसकी बाकी सवारी भी चली जाएंगी। वह गिड़गिड़ा रहा था कि आप न उतरिए, क्योंकि उसकी 20 साल की बेटी है जो पैरालाइज्ड है।

मैंने सोचा कि चलो इसको 20 रुपए के बजाय 100 दे दूंगी। उसने ऑटो स्लिप रोड पर ले लिया। एक जगह जाकर ऑटो रुक गया। मैंने घबराकर फ्रेंड को लोकेशन भी भेजी लेकिन उसका नेट ऑफ था। मैं ऑटो से उतरी, इतने में किसी ने मुझे पीछे से ऑटो में खींच लिया और फिर…। एक बार सोचा कि किसी को कुछ नहीं बताऊंगी, फिर अंदर से जैसे आवाज आई ‘नहीं’। इन लोगों ने मेरे साथ ऐसा किया है तो आगे दूसरों के साथ भी करेंगे। इसलिए सबक सिखाना जरूरी है। बस इसलिए यह लड़ाई लड़ी।

पक्के दोस्त… मुझे अकेला नहीं छोड़ते, हंसाने के लिए कुछ भी कर देते थे…

जब यह मिसहैप हुआ तब मेरा फोन काम नहीं कर रहा था। मैं रोड पर आई, गाड़ियां रोकी, बाइक वालों को रोका। बताया कि मेरे साथ क्या हुआ है, हेल्प मांगी। इन्हीं में से किसी ने 100 नंबर पर पुलिस को फोन किया तो किसी ने मेरे फियांसे (मंगेतर) को। 10 मिनट में फ्रेंड्स इकट्ठा हो गए। मुझे पीजी में छोड़ने के बजाय अपने घर ले गए। लगातार मेरे साथ रहे, कभी अकेला नहीं छोड़ा। मैं शुरू से ही बोल्ड रही हूं, लेकिन कभी न कभी तो हर कोई टूटता ही है। ऐसे ही एक दिन जब मैं उदास होकर साथ वाले रूम में जाकर रो रही थी तो सभी दोस्तों ने मुझे तलाशना शुरू कर दिया कि मैं कहां गायब हो गई हूं। मुझे रोता देखकर दोस्त हंसाने के लिए ऊट-पटांग हरकतें करने लगे। जब मुझे हंसी आई तो फिर हम सभी आउटिंग पर चले गए। ऐसा कई बार हुआ। मैं उदास होती तो दोस्त कहते- चलो मार्किट की गेड़ी मारकर आते हैं।

लर्निंग… ऐसे हादसाें के बाद अकेलापन जानलेवा साबित होता है। अपने-बेगाने सभी सोसायटी में बदनामी का खौफ दिखाते हैं। मेरे दोस्तों ने मुझे सपोर्ट किया। डर मन से निकाल दिया।

 

सच्ची मोहब्बत… पहले से कहीं ज्यादा मेरी फिक्र करते हैं वो, अगले साल करेंगे हम शादी​

जब चंडीगढ़ आई तो 19 साल की थी। करीब पांच साल से मैं इनसे रिलेशनशिप में हूं। जब मिसहैप हुआ तभी किसी के फोन से मैंने इनसे बात की। वे लगभग 200 किलोमीटर दूर थे, लेकिन कुछ ही घंटोें के बाद यहां पहुंच गए। मुझे सपोर्ट किया। अब वे विदेश में हैं। अब उन्हें पहले से कहीं ज्यादा मेरी फिक्र और परवाह रहती है। इस हादसे के बाद ही वे अपनी फैमिली को मेरे घर ले आए, शादी की बात करने। अगले साल तक हमारी शादी हो जाएगी और फिर मैं भी उनके साथ एब्रॉड चली जाऊंगी।

 

लर्निंग… ऐसे ज्यादातर मामलों में हादसे के बाद लड़के नजरें फेर लेते हैं, लेकिन मुझे हर कदम पर इनका सपोर्ट मिला। पीछे हटने के बजाय फैमिली को साथ लाकर शादी पक्की की।

 

इमोशंस समझने वाली अदालत…वकील ने शर्मनाक सवाल पूछे तो जज मैडम ने डांटते हुए उसे रोका

कोर्ट में आरोपियों के चेहरे बार-बार सामने आते, देखते ही मैं रोना शुरू कर देती थी। जज मैडम ने मुझे ऐसी हालत में देखा तो मुझे ऐसी जगह पर चेयर पर बिठाना शुरू किया जहां से वे दरिंदे मुझे दिखाई नहीं देते थे। मैं बस उनको सुन सकती थी। मैडम ने मेरे इमोशन्स को समझा। मुझे इस बात से बहुत डर लगता था कि कोर्ट में वकील ऐसे-वैसे सवाल पूछते हैं। एक तारीख पर वकील ने रेप के वक्त कपड़ों को लेकर शर्मनाक सवाल पूछने शुरू कर दिए। मैडम ने उसे डांटते हुए इस तरह के सवाल पूछने से मना किया।

लर्निंग… अदालत ने विक्टिम की इमोशंस को बारीकी से समझकर ऐसा माहौल दिया जहां वह बेखौफ होकर अपनी बात कह सके।

 

मां जैसी इंस्पेक्टर… तुम ब्रेव गर्ल हो, हमें ऐसे लोगों को सजा दिलानी है…

केस की जांच कर रही इंस्पेक्टर गुरजीत काैर ने कभी भी पहचान को उजागर नहीं होने दिया। उनके साथ एक रिश्ता कायम हो गया। हादसे के बाद पीजी छोड़ना पड़ा तो गुरजीत काैर ने नया पीजी दिलवाया। सिर्फ उसे ही नहीं, सहेली को भी माेटिवेट किया, ताकि वह उसी के साथ रहे। पीजी में हफ्ते में एक बार जरूर आती थीं। पीजी मालिक को कहा कि मैं इसकी माैसी हूं और पड़ोसियाें को मां बताया। उनसे ऐसे घुल-मिल गए थे कि हफ्ते में एक बार खाने पर जरूर बुलाते थे। अगले हफ्ते थाने में लंच पर इंस्पेक्टर गुरजीत कौर हमें बुलाती थीं। रोजाना दो से तीन बार फोन पर बातचीत जरूर करती थीं। मुझे बेटी की तरह रखा। कभी हारने नहीं दिया। हर बार कहतीं कि तुम्हें लड़ना है ऐसे लोगों के खिलाफ। आवाज बननी है उनकी जो बोल नहीं पाती और चुप रह जाती हैं। इंस्पेक्टर गुरजीत कौर ने एक मां की तरह अपना रोल निभाया। समझाती रहतीं कि हमें ऐसे लोगों को सजा दिलानी है, तुम ब्रेव गर्लहो, डरो नहीं। बार-बार चेहरों को दिमाग में न लाओ वरना परेशान हो जाओगी।

 

लर्निंग… रेप के मामलों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते हैं। लेकिन यहां संबंधित थाने के बजाय एक लेडी इंस्पेक्टर को केस सौंपा गया। उन्होंने मामले में बहुत अच्छे तरीके से काम किया।

 

यह था मामला: सेक्टर-53 में ऑटो में सवार तीन लोगों ने किया था गैंगरेप

सेक्टर-53 में हुए ऑटो गैंगरेप में आज फैसला आ सकता है। 17 नवंबर 2017 की शाम मोहाली में पीजी रहने वाली लड़की ने करीब साढ़े 7 बजे अपने घर के लिए सेक्टर 36/37 लाइट प्वाइंट से ऑटो लिया। ऑटो में दो लड़के पहले से बैठे थे। वे ऑटो को सेक्टर-42 पेट्रोल पंप ले गए, जहां उन्होंने पेट्रोल भरवाया। इसके बाद उन्होंने चौक से यू-टर्न लिया और पंप के सामने पड़ते जंगलों में ऑटो ले गए। यहां तीनों ने बारी-बारी लड़की के साथ रेप किया और मारपीट भी की। लड़की का कहना था कि ऑटो चालक मोहम्मद इरफान उसे बेटी कहकर पुकार रहा था। वह ऑटो को यू-टर्न लेकर सेक्टर-53 की तरह ले गया। जहां उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उससे रेप किया। पुलिस ने इन्हें पकड़ा, वहीं पूरी हिम्मत जुटाकर 21 साल की लड़की ने पूरे दमखम से केस को लड़ा। आरोपियों से डरी नहीं। वकीलों के सवालों पर जलील भी होना पड़ा, हालात ऐसे हुए कि बंद कमरे में आरोपियों के सामने कई बार उसके आंसू भी निकले। लेकिन यहीं आंसू उसे हिम्मत देते रहे। इस केस में आज फैसला आएगा। बच्ची अपने घर पर है और इंतजार है कोर्ट के फैसले का।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here