मातनहेल झाड़ली गांव की वयोवृद्धा निम्बो देवी 105 वर्ष की उम्र में भी अपने काम खुद करती हैं। सुबह-शाम टहलती हैं, बच्चों को समझाकर उन्हें सही राह भी दिखाती हैं। इतनी उम्र में भी उन्हें शरीर में कोई बीमारी नहीं है। सुबह उठकर चाय पीती हैं। थोड़ी देर घर के आंगन में चहलकदमी भी करती हैं। दिन में एक बार रोटी खाती हैं, जबकि दो समय फलों का सेवन करती हैं। उम्र के इस पड़ाव को समझाने के लिए इतना काफी है कि उनका एक बेटा नफे सिंह 78 साल का है। उनका छोटा बेटा ओमप्रकाश 66 वर्ष का है। पोता मुकेश कुमार 57 साल का हो चुका है। निम्बो देवी का जन्म एक जनवरी 1913 में हुआ, उनके चार लड़के हैं। झाड़ली के इस परिवार में चार पीढ़ी के मिलाकर 35 सदस्य हैं। एेसे में पूरे गांव में निम्बाे देवी अपने संतुलित खानपान व इस उम्र में भी बेहतर सेहत का एक सकारात्मक संदेश लाेगाें काे दे रही हैं।

सुपर दादी बोली, खेतों से लेकर घर तक खूब काम करती थी, इस वजह से हूं ठीक

105 साल की निम्बो देवी को सुनने में थोड़ी सी परेशानी होती है, लेकिन कान के पास बात कही जाए तो जवाब भी तुरंत दे देती है। उनकी लंबी उम्र का राज पूछा गया तो निम्बो देवी ने बताया कि मैंने कभी भी आलस नहीं किया। खेत में जुताई भी अकेले ही कर आती थी। पशुओं को नहलाना और उनका चारा काटना दिनचर्या में शामिल था। उसके बाद घर काम भी करती थी। यानी उन्होंने लंबी उम्र का राज जमकर मेहतन करना बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या आप बाहर का खाना खाती हैं तो निम्बो देवी ने बताया कि अब तो 30 साल से उन्होंने तला हुआ कोई भोजन नहीं खाया। उससे पहले घर का तेल होता था तो वही प्रयोग में लाते थे। पकवान भी बनाती थी और खाती भी थी। वो घर वाला बिना मिलावट का तेल साल्हावास. 105 साल की िनम्बो देवी और घी हानिकारक नहीं होते थे। अब तो हर चीज में मिलावट है।

 

गुलामी के दिन आज भी याद हैं

आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 के समय उनकी उम्र 34 साल थी। उन्हें गुलामी का दौर पूरी तरह याद है। निम्बो देवी बताती हैं कि कभी अंग्रेज सिपाही मिल जाते थे तो डर लगता था। घर वालों ने हिदायत दे रखी थी कि अकेले घर से बाहर नहीं निकलना है। उनके बेटे बताते हैं कि हमें मां गुलामी के दिनों के अजीबोगरीब किस्से सुनाया करती थीं।

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