फ़िल्में बनाने में मेहनत लगती है और अति बेकार फ़िल्में बनाने में ज़्यादा मेहनत. मज़ाक है क्या? पैसा और वक़्त लगाना और कुछ भी खिचड़ी बनाकर रिलीज़ कर देना? अगर पैसा और जान-पहचान हो तो कोई भी एक बोरिंग, अच्छी ‘बेकार फ़िल्म’ बना सकता है.

ये कहना ज़रा मुश्किल है कि ऐसी फ़िल्में निर्माताओं ने जान-बूझकर बनाई हैं या उनसे ऐसे ही बन गई हैं:

हमने बनाई है ऐसी ही कुछ फ़िल्मों की सूचि जिनकी स्क्रीप्ट और अभिनेताओं का अभिनय इतना बुरा है कि सिर ही नहीं, दिमाग़ में भी दर्द हो जाएगा:

1. गुंडा


इस फ़िल्म के किरदारों का नाम और Intro आज कई Memes की प्रेरणा बन चुका है. यक़ीन करना मुश्किल है कि एक Character का नाम है ‘चुटिया’ और ये ‘लंदन की सेक्स की गोलियां’ खाता है. फ़िल्म लिखने वाले की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. एक सीन में साईकिल के पीछे छिपकर मिथुन चक्रवर्ती गोलियों से बचते भी नज़र आए हैं. कुल मिलाकर कहा जाए, तो फ़िल्म में कुछ भी नहीं है लेकिन PJs पर हंसने वालों के लिए फ़िल्म में बहुत कुछ है.

2. मैं प्रेम की दीवानी हूं


‘चित्त चोर’ अच्छी लगी थी, लेकिन उसी कहानी पर बनी ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ में कई चीज़ें सिर के ऊपर से गई. Animated तोता जो सिर्फ़ फ़िल्मी बातें करता है और गुस्साने पर नॉर्मल डॉगी भी Animated बन जाता है जैसे कई सीन फ़िल्म को अजीब ही नहीं महाअजीब बना देते हैं. ‘तो फिर प्रोबलम क्या है’ को मशहूर बनाने का श्रेय इसी पिक्चर को जाता है. सबसे अहम सवाल है, पंकज कपूर ने ये फ़िल्म क्यों की?

3. जानी दुश्मन


इस फ़िल्म को देखकर नाग-नागिन और उनके रिश्तेदार भी अवसाद ग्रसित हो जाएंगे. फ़िल्म के गाने, कॉस्ट्यूम, कहानी सब इस फ़िल्म को बेकार बनाने में भागीदार थे. बिग बॉस में नज़र आए अरमान कोहली की इक्का-दुक्का फ़िल्मों में से एक ये है. सोनु निगम ने भी फ़िल्मों में डेब्यू करने के लिए ये फ़िल्म चुनी, अगर न चुनी होती तो शायद गायक अभिनेता भी बन सकते थे.

4. हिम्मतवाला


जीतेंद्र और श्रीदेवी की ‘हिम्मतवाला’ की रिमेक में नज़र आए अजय देवगन और तमन्ना भाटिया. सोशल मीडिया में इस फ़िल्म के रिव्यू में लिखा गया, ‘इस फ़िल्म में अगर कुछ देखने लायक है, तो वो है तमन्ना की Belly’. इस रिमेक ने पुरानी फ़िल्म के फ़्लॉप होने के रिकॉर्ड तोड़ डाले.

5. नक्शा


‘Indiana Jones’ की काफ़ी बेकार कॉपी है नक्शा. सनी देओल, विवेक ओबेरॉय और समीरा रेड्डी एक नक्शे की मदद से ख़ज़ाने तक पहुंचने की कोशिश करते हैं और उनके रास्ते में कई मुसीबतें आती हैं. हमारी राय यही है कि ये फ़िल्म देखने से पहले ‘Indiana Jones’ देख लीजिए, कहानी पता होगी और आप Fast Forward करके पिक्चर देख सकेंगे.

6. राम गोपाल वर्मा की आग


बस नाम ही काफ़ी है. रामू ने ‘शोले’ का रिमेक बनाने की कोशिश की और काफ़ी बुरी तरह पिट गए. फ़िल्म देखकर दिमाग़ में ये प्रश्न आएगा, वो कौन सी आग थी जिसने रामू को ये फ़िल्म बनाने पर मजबूर कर दिया? और एक बात, ‘शोले’ की जगह कोई और फ़िल्म ले सकती है भला? पर रामू की कोशिश की दाद देनी पड़ेगी, अमिताभ के साथ फ़िल्म बनाई और वो भी ऐसी.

7. रक्त


बिपाशा बसु ने कई हॉरर फ़िल्में की, उन्हीं में से एक है. गौरतलब है कि ‘राज़’ जैसी कोई भी हॉरर फ़िल्म बनाने में वो असफ़ल रही. ‘रक़्त’ में बिपाशा भविष्य देख सकती हैं. अगर वो फ़िल्म का भविष्य देख पाती तो शायद फ़िल्म साइन न करतीं. ये हॉरर फ़िल्म डराती नहीं, बोर करती है.

8. द्रोण

बॉलीवुड को अपना सुपरहीरो दिलाने की कोशिश में ये फ़िल्म बनाई गई. लेकिन फ़िल्म में Indian Martial Arts जैसे कलारीपयट्टु, छाऊ, गटका और तलवारबाज़ी दिखाई गई है, जो सराहनीय है. फ़िल्म की कहानी न सिर्फ़ बोरिंग है बल्कि उसका ओर-छोर भी पता नहीं चलता है.

लिस्ट लंबी है और हमने बहुत कुछ छोड़ा भी है. आपको जो फ़िल्म सबसे घटिया लगी है, उसे कमेंट बॉक्स में छाप दें.

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