मोदी सरकार ने मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी में काफी अहम बदलाव किए हैं। आने वाले दिनों में डेंटल और नपुसंकता संबधी बीमारियों में मरीजों को बीमा कवर दिया जाएगा।

देश की बीमा पॉलिसी को निर्धारित करने वाली सर्वोच्च संस्था इंश्योरेंस रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से बीमा पॉलिसी में कई अहम बदलाव किए गए हैं। आईआरडीएआई ने करीब 10 बीमारियों को ऑप्शनल कवर की लिस्ट से हटा दिया गया है। जिनमें डेंटल, स्टीम सेल, और नपुसंकता और मनोवैज्ञानिक उपचार के मुख्य रूप से शामिल हैं।

IRDAI की ओर से दिए गए ऑप्शनल कवर में मुख्यतया उन रोगों को शामिल किया गया है। जिनसे काफी लोग पीड़ित हैं लेकिन उनके अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती। इन बीमीरियों में हार्मोन रिप्लेस थेरपी, मोटापे का इलाज, यौन संचरित रोगों, एचआईवी और एड्स जैसे गंभीर रोग शामिल हैं। IRDAI ने सोमवार को इससे जुड़ा एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है।

इंडस्ट्री ऐनलिस्ट और शोध कर्ताओं का कहना है कि अब तक ये रोग ऑप्शनल की श्रेणी में आते थे। जिसके चलते ज्यादातर रोगों में बीमा कंपनी कवर का फायदा रोगियों को नहीं देती। अब बीमा कंपनियों के पास मौका है वह अपनी स्कीमों को फिर से डिजाइन करके इन चीजों को उनमें शामिल कर लें। इन सभी रोगों को बीमा कवर में शामिल करने के लिए IARDAI की ओर नया आदेश जारी किया जा सकते हैं।

साल 2016-17 में जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक भारत में लोग स्वास्थ बीमा लेने के प्रति जागरूक नहीं है। सिर्फ 43 करोड़ लोग जो कुल जनसंख्या का 34 प्रतिशत है उन्होंने ही अपना हेल्थ बीमा करवाया हुआ है। ये आकड़े नैशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 की ओर से जारी किए गए थे। साथ ही यह भी पता चला है कि देश में प्राइवेट बीमा कंपनियों के उदय के बावजूद लोगों का भरोसा सार्वजनिक बीमा कंपनियों पर है।

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