एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलकर नया कानून बनाने के विरोध में सवर्ण संगठनों ने गुरुवार को भारत बंद बुलाया है। बंद का सबसे ज्यादा असर बिहार में देखा जा रहा है। बिहार के दरभंगा, आरा और मुंगेर में प्रदर्शन हुए। यहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें रोक दीं। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र में भी प्रदर्शनकारियों ने चक्काजाम किया।

उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद, मध्यप्रदेश के ग्वालियर और भोपाल में सुबह बाजार बंद देखे गए। मध्यप्रदेश में कई स्कूल-कॉलेज बंद हैं। पेट्रोल पंपों को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रखा गया है। राज्य के 35 जिलों में हाईअलर्ट है। इससे पहले, दलित संगठनों ने भी 2 अप्रैल को भारत बंद बुलाया था।

संशोधित कानून के विरोध में पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के ग्वालियर स्थित आवास पर प्रदर्शन हुआ था। राज्य में मंत्री माया सिंह को काले झंडे दिखाए गए थे।

विदिशा में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर को विरोध का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के सामने भी नारेबाजी हुई थी।

बढ़ते विरोध की वजह से पुलिस ने ग्वालियर में मंत्रियों के बंगलों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। ग्वालियर-चंबल अंचल के सभी सांसद, मंत्री और विधायकों ने बुधवार और गुरुवार के तमाम सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए।

प्रशासन ने  ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर और दतिया में धारा 144 लागू कर सभा, जुलूस और प्रदर्शन पर पाबंदी लगा दी।

जानिए आखिर क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

21 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है।

कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित समुदाय ने 2 अप्रैल को ‘भारत बंद’ किया था। इसमें आंदोलन में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।


सरकार का फैसला

दलित समुदाय की नाराजगी को देखते हुए केंद्र सरकार ने SC/ST एक्ट को पुराने और मूल स्वरूप में लाने का फैसला किया। सरकार ने कैबिनेट की मीटिंग में SC/ST एक्ट संशोधन विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के फेरबदल का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

क्या है सवर्णों की मांग

6 सितंबर को SC/ST एक्ट के विरोध में भारत बंद करने वाले सवर्णों ने 2 मांग की हैं। इस पर करणी सेना के जिला प्रभारी मयंक प्रताप सिंह राजावत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट 1989 ने जो फैसला सुनाया था

उसे वैसा ही रखा जाए। यानी इस तरह के मामले में पहले जांच हो उसके बाद गिरफ्तारी हो। वहीं, यदि केस झूठा पाया जाता है तब केस करने वाले के ऊपर आर्थिक दंड भी दिया जाए।

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