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राजस्थान की अदालत ने दहेज़ की रोकथाम के लिए ऐतिहासिक काम किया है! स्वागत कीजिये

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हमने कई बार सुना कि दहेज़ को लेकर कानून सख्त है. हमने इन बातों को सुना, इन्हें नाकारा और कानून का उल्लंघन करते हुए तबियत से दहेज़ लिया. पूर्व की बातें अलग थीं वर्तमान के किस्से अलग हैं. इस कुप्रथा को रोकने के लिए अब वो किया जा रहा है जिसके बारे में अब से पहले किसी ने शायद ही सोचा हो. दहेज को लेकर कानून कितना गंभीर है इसे हम राजस्थान की एक अदालत के फैसले से समझ सकते हैं. आलात ने दहेज देने वाले पिता पर केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं. सुनकर आश्चर्य होगा मगर ये सत्य है. जोधपुर के एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था. लड़की के पिता ने शिकायत में कहा था- उसने बेटी की शादी में दहेज में एक लाख रुपए नगद दिए थे. इसे आधार बनाकर लड़के के पिता ने समधी पर दहेज देने का केस दर्ज करने आग्रह न्यायालय से किया था. दिलचस्प बात ये है कि यह पहला मामला है, जब किसी दहेज देने वाले पिता पर कार्रवाई की गई है.

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दहेज को एक बड़ी सामाजिक बुराई के रूप में देखा जाता है जिसे लेकर सरकारें और कानून हमेशा से ही सख्त रहा है

क्या था मामला

जोधपुर के रिटायर्ड फौजी रामलाल ने बेटी मनीषा का विवाह साल 2017 में कैलाश प्रजापति के साथ किया था. कैलाश नोएडा में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत है. मनीषा का आरोप है कि विवाह के बाद से अब तक उसके पति से किसी भी तरह के संबंध नहीं बन पाए. साथ ही लड़की ने ये आरोप भी लगाया था कि लड़के का पिता उसपर बुरी नजर रखता है. मनीषा बताती हैं कि कैलाश और उसके भाई की शादी एक साथ हुई थी. कैलाश के भाई के ससुराल वालों ने उसके ससुराल वालों को खूब दहेज़ दिया था जिसे लेकर आए रोज उसे ताना मिलता था और जैसे जैसे दिन बीते स्थिति गंभीर होती गई. बाद में तंग आकर उसने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और ससुर पर छेड़छाड़ का केस दर्ज करवाया.

फैमिली कोर्ट में मनीषा और उसके पिता रामलाल के बयान दर्ज किए गए. रामलाल ने कोर्ट में बताया कि उसने बेटी की शादी धूमधाम से की थी और उसकी जैसी हैसियत थी उससे अच्छा दहेज़ उसने दिया. लड़की के पिता ने ये भी बताया कि उसने बंद लिफाफे में वर पक्ष को एक लाख रुपए दिए. पेशे से शिक्षक मनीषा के ससुर का आरोप है कि मनीषा और उसके पिता ने शादी का पूरा खर्च वापस लेने का दबाव बनाया और इसी बात को आधार बनाकर केस दर्ज करवाया है.

क्योंकि अपने बयान में रामलाल इस बात को स्वीकार किया है कि उसने बंद लिफाफे में एक लाख रुपए दिए हैं इसलिए लड़के के पिता का कहना है कि लड़की के पिता ने दहेज़ दिया है इसलिए उनपर मुकदमा दर्ज किया जाए. कोर्ट इस बात से सहमत हुई और उसने आदेश दिया है कि इस मामले में केस दर्ज  किया जाए. मामले को लेकर जेठमल के वकील का कहना है कि दहेज लेना और देना दोनों अपराध हैं. ऐसे में एक पक्ष ही सजा क्यों भुगते. दूसरे पक्ष पर भी केस दर्ज कर उसका चालान पेश किया जाना चाहिए.

गौरतलब है कि ये अब तक अपनी तरह का पहला मामला है जिसमें लड़की के पिता पर इसलिए केस दर्ज हुआ है क्योंकि उन्होंने दहेज़ दिया है. निश्चित तौर पर दहेज एक सामाजिक बुराई है और ये खबर उन लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण हैं जो इस कुप्रथा की मर झेल रहे हैं. कह सकते हैं कि इस फैसले का इंतजार देश को लम्बे समय से था. अब चूंकि ये मामला सामने आ गया है तो ये कहना भी गलत नहीं है कि इससे दहेज जैसी कुप्रथा पर काफी हद तक लगाम लगेगी.

हम ऐसा इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि लड़के के पिता से ज्यादा लड़की के पिता के दिमाग में ये डर बन रहेगा कि यदि वो दहेज देता है तो उसे जेल की हवा खानी होगी. चूंकि नई सरकार में अब हर खरीदारी की लिखापढ़ी पर ज्यादा बल दिया जा रहा है तो यदि लड़की का पिता किसी दूसरे तरीके को अपनाता है तो भी वो खासी मुसीबत में आ सकता है.

बात साफ है शादी चाहे अंबानी के परिवार में हो या फिर किसी आम आदमी के परिवार में उसे बिल्कुल साधारण और कम खर्च में होना चाहिए और यदि लड़की का पिता दहेज़ देने या शादी धूमधाम से करने को इतना ही आतुर है तो उसे अपना अतिरिक्त धन प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कर उन लोगों की मदद करनी चाहिए जो किसी आपदा में फंसे हुए हैं.बहरहाल ये फैसला एक नजीर है जिसका स्वागत उन तमाम लोगों को करना चाहिए जो दहेज के खिलाफ हैं और लगातार ये मांग करते आ रहे हैं कि इस समस्या के मूल का ही विनाश कर देना चाहिए.

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